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नशे की तलब के ट्रिगर कैसे पहचानें (एक आसान ट्रिगर डायरी के साथ, जिसे आप आज ही शुरू कर सकते हैं)
ट्रिगर यूँ ही नहीं आते। एक हफ़्ते की इस ट्रिगर डायरी से पहचानें कि किन लोगों, जगहों, भावनाओं और समय पर आपको तलब लगती है, फिर उनसे निपटने की योजना बनाएँ।
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अपने ट्रिगर पहचानने का सबसे आसान तरीक़ा है एक हफ़्ते तक नशे या पुरानी आदत की हर तलब को लिखना: समय, जगह, आप किसके साथ थे, कैसा महसूस कर रहे थे और तलब कितनी तेज़ थी। फिर देखें कि कौन-सी बातें बार-बार सामने आती हैं: वही आपके मुख्य ट्रिगर हैं, और हर एक के लिए अलग योजना बनाई जा सकती है।
बहुत ज़्यादा या रोज़ शराब पीते हैं? छोड़ने से पहले डॉक्टर से बात करें। शराब छोड़ने पर होने वाला विड्रॉल ख़तरनाक हो सकता है। पसीना आना, घबराहट या हल्की कँपकँपी चेतावनी के संकेत हैं: डॉक्टर को फ़ोन करें। ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा NHS के अनुसार, साफ़ दिखने वाली कँपकँपी, भ्रम, मतिभ्रम (जो नहीं है, उसे देखना या सुनना) या दौरा पड़ने पर तुरंत आपातकालीन इलाज की ज़रूरत है।
ट्रिगर क्या है (और क्या नहीं)
ट्रिगर वह कोई भी चीज़ है जो शराब पीने, सिगरेट पीने, जुआ खेलने या किसी और पुरानी आदत में लौट जाने की तलब जगा दे।
लत के ज़्यादातर ट्रिगर सीखे हुए होते हैं। अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज़ बताता है कि रोज़मर्रा के जो संकेत पहले के सेवन से जुड़ गए हैं, वे तलब जगा सकते हैं, तब भी जब वह चीज़ आसपास न हो।
लेकिन ट्रिगर कोई हुक्म नहीं है। मनोवैज्ञानिक एलन मार्लैट के रिलैप्स (पुरानी आदत पर लौटना) से बचाव वाले मॉडल की एक समीक्षा कहती है कि जोखिम भरे पल में आप कैसे पेश आते हैं, यह उस पल से ज़्यादा मायने रखता है। और नए तरीक़े से पेश आना सीखा जा सकता है।
अंदरूनी और बाहरी ट्रिगर
अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज़ एंड अल्कोहलिज़्म (NIAAA) ट्रिगर को दो तरह का मानता है। बाहरी ट्रिगर का अंदाज़ा लगाना और उनसे बचना आसान होता है। अंदरूनी ट्रिगर की वजह से तलब ऐसी लग सकती है, जैसे कहीं से भी अचानक आ गई हो।
बाहरी ट्रिगर: लोग, जगहें, चीज़ें और समय
- लोग: वे दोस्त जिनके साथ आप पीते थे या सिगरेट पीते थे, परिवार वालों से तनाव भरी मुलाक़ात।
- जगहें: कोई बार या ठेका, वह पान की दुकान जहाँ से आप सिगरेट लेते थे, वह सोफ़ा जहाँ बैठकर आप दाँव लगाते थे।
- चीज़ें: फ़्रिज में रखी बोतल, लाइटर, किसी बेटिंग ऐप का नोटिफ़िकेशन।
- समय: काम के बाद, शुक्रवार की रात, सैलरी वाला दिन, सुबह की चाय।
मार्लैट के शोध में पाया गया कि शराब के आम ट्रिगर में पीने वाले दूसरे लोगों के बीच होना और अपने पसंदीदा बार के सामने से गुज़रना शामिल हैं। अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की वेबसाइट Smokefree.gov के अनुसार, सिगरेट के आम ट्रिगर हैं: सुबह उठना, कॉफ़ी, गाड़ी चलाना, खाना ख़त्म करना, काम के बीच का ब्रेक और शराब।
अंदरूनी ट्रिगर: भावनाएँ, विचार और शरीर की हालत
- भावनाएँ: तनाव, ऊब, अकेलापन, ग़ुस्सा। अच्छी भावनाएँ भी इसमें आती हैं, जैसे उत्साह।
- विचार: “आज तो एक बनता है।” “बस इस बार।”
- शरीर की हालत: शरीर में खिंचाव, सिरदर्द, बेचैनी, थकान या भूख।
आदत का चक्र: संकेत, रूटीन और इनाम
चार्ल्स डुहिग की किताब The Power of Habit ने इस मॉडल को मशहूर बनाया:
- संकेत: यानी ट्रिगर। एक थका देने वाले दिन के बाद आप शाम 6 बजे घर में क़दम रखते हैं।
- रूटीन: आप क्या करते हैं। आप एक बियर खोल लेते हैं।
- इनाम: आपको क्या मिलता है। तनाव कुछ देर के लिए कम हो जाता है।
मनोवैज्ञानिक वेंडी वुड और डेविड नील बताते हैं कि आदतें तब बनती हैं, जब कोई काम एक ही माहौल में बार-बार दोहराया जाता है। फिर सिर्फ़ वह माहौल ही, बिना कोई सोचा-समझा फ़ैसला किए, वह काम शुरू करवा सकता है।
एक हफ़्ते की ट्रिगर डायरी से अपने ट्रिगर कैसे पहचानें
इस हफ़्ते जब भी तलब महसूस हो, झट से एक छोटी-सी एंट्री लिख लें। तलब दर्ज करने के लिए NIAAA का फ़ॉर्म सुझाव देता है कि तलब के बाद जितनी जल्दी हो सके, उसका ब्योरा लिख लें।
यह ट्रिगर वर्कशीट किसी नोटबुक में या फ़ोन के नोट्स ऐप में उतार लें:
- समय:
- जगह:
- कौन साथ था:
- भावना या विचार:
- तलब (1 से 10):
- मैंने क्या किया:
एक काल्पनिक उदाहरण:
| कब | कहाँ, किसके साथ | भावना | तलब, मैंने क्या किया |
|---|---|---|---|
| सोम, शाम 6 बजे | रसोई, अकेले | तनाव | 7, थोड़ी सैर की |
| बुध, दोपहर 12 बजे | ब्रेक, सहकर्मी सिगरेट पी रहे थे | ऊब | 5, च्युइंग गम चबाई |
| शुक्र, रात 9 बजे | पार्टी, दोस्त | उत्साह | 8, पार्टी जल्दी छोड़ दी |
| रवि, शाम 4 बजे | सोफ़ा, अकेले | अकेलापन | 6, दोस्त को मैसेज किया |
सिर्फ़ चूक नहीं, हर तलब दर्ज करें। जिस तलब को आपने बिना हार माने गुज़र जाने दिया, वह भी काम की जानकारी है। और लिखना चाहें, तो रिकवरी डायरी के लिए ये सवाल आज़माएँ।
Guardian Angel में, रोज़ के चेक-इन वाले नोट में आप दिन की सबसे तेज़ तलब लिख सकते हैं (मुफ़्त नोट में 100 अक्षरों तक की जगह है), और आगे चलकर अंतर्दृष्टि हफ़्ते के आपके सबसे मुश्किल दिन को चिह्नित कर सकती है। देखें: अपने जोखिम भरे दिन और समय कैसे पहचानें।
डायरी को पढ़ना: अपने 3 सबसे बड़े ट्रिगर खोजें
हफ़्ते के आख़िर में 10 मिनट निकालें:
- तेज़ तलब पर घेरा बनाएँ। जिस तलब को 6 या उससे ज़्यादा अंक मिले हों, उस पर निशान लगाएँ।
- हर एक को नाम दें। व्यक्ति, जगह, चीज़, समय, भावना, विचार या शरीर की हालत।
- दोहराव गिनें। कौन-सी बात तीन या उससे ज़्यादा बार आई है? अगर कोई नहीं, तो एक हफ़्ता और लिखें।
- मेल देखें। हो सकता है तलब सिर्फ़ तब उठती हो, जब आप थके हुए भी हों और अकेले भी।
- अपने 3 सबसे बड़े ट्रिगर चुनें। जो सबसे ज़्यादा बार आए या सबसे तेज़ रहे, उन्हें चुनें।
यह भी लिखें कि क्या काम आया: अगर टहलने से तलब गुज़र गई, तो उस तरीक़े को अपने पास रखें। NIAAA शराब की तलब को “थोड़ी देर की, पहले से अंदाज़ा लगाने लायक और क़ाबू में आने वाली” बताता है। तलब कितनी देर रहती है, इस पर और पढ़ें।
अगर कुछ हफ़्तों बाद भी तलब क़ाबू से बाहर लगे, या आपकी डायरी उदासी या चिंता से भरी हो, तो डॉक्टर या थेरेपिस्ट से बात करें। शराब के मामले में, डॉक्टर से ऐसी दवाओं के बारे में पूछें जिनकी लत नहीं लगती और जो पीने की इच्छा कम कर सकती हैं।
ट्रिगर से कैसे बचें, उन्हें कैसे बदलें या उनका सामना कैसे करें
अपने हर बड़े ट्रिगर के लिए एक तरीक़ा चुनें: बचें, बदलें या सामना करें। यह NIAAA के ‘पहचानें, बचें, सामना करें’ वाले तरीक़े पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में होता है।
बचें
शुरुआत में ट्रिगर से बचना अक्सर सबसे अच्छा होता है, हालाँकि हमेशा के लिए नहीं। घर में शराब बहुत कम रखें या बिल्कुल न रखें, पीने-पिलाने वाले प्लान छोड़ दें और बेटिंग ऐप डिलीट कर दें।
बदलें
संकेत के आसपास का रूटीन बदल दें। Smokefree.gov सुझाव देता है कि कॉफ़ी किसी और समय पिएँ, या खाने के तुरंत बाद ब्रश कर लें। मार्लैट का मॉडल छोटे-छोटे बदलाव भी सुझाता है, जैसे कुछ समय के लिए दूसरी कुर्सी पर बैठना या कोई और संगीत सुनना।
सामना करें
हर ट्रिगर से बचा नहीं जा सकता, ख़ासकर तनाव जैसे अंदरूनी ट्रिगर से। ये आज़माएँ:
- ख़ुद को याद दिलाएँ कि आप यह बदलाव क्यों कर रहे हैं।
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
- कुछ और करें, जैसे टहलना या नहाना।
- उस विचार पर सवाल उठाएँ: “बस एक? पिछली बार भी एक से शुरू होकर बात आगे बढ़ गई थी।”
- तलब को गुज़र जाने दें: उससे लड़ें नहीं, उसे लहर की तरह आने और जाने दें।
- वहाँ से निकल जाएँ, और निकलने का तरीक़ा पहले से तय रखें।
अगर-तो योजनाएँ कैसे लिखें
अगर-तो योजना किसी ट्रिगर को पहले से किसी काम से जोड़ देती है: “अगर [ऐसा हो], तो [मैं यह करूँ]।” मनोवैज्ञानिक इन्हें इम्प्लीमेंटेशन इंटेंशन कहते हैं।
पीटर गॉलविट्ज़र और पास्कल शीरन की 94 परीक्षणों की एक बड़ी समीक्षा में पाया गया कि अगर-तो योजनाएँ लोगों को अपने लक्ष्य तक पहुँचने में साफ़ तौर पर मदद करती हैं। शराब और सिगरेट के मामले में असर कम है: 21 ट्रायल की 2020 की एक समीक्षा में छोटी लेकिन असली कमी पाई गई, ज़्यादातर छात्रों और आम लोगों में।
अपने हर बड़े ट्रिगर के लिए एक योजना लिखें:
- अगर शाम 6 बजे तनाव लेकर घर पहुँचूँ, तो 10 मिनट टहलने जाना है।
- अगर कोई सहकर्मी सिगरेट के लिए पूछे, तो “नहीं, शुक्रिया” कहना है और च्युइंग गम चबानी है।
- अगर रविवार दोपहर अकेलापन लगे, तो बेटिंग ऐप खोलने के बजाय किसी दोस्त को मैसेज करना है।
“अगर” वाला हिस्सा ऐसा रखें जिसे आसानी से पहचाना जा सके, और “तो” वाला हिस्सा छोटा और करने लायक।
आपके सबसे बड़े ट्रिगर और अगर-तो योजनाएँ ही एक पन्ने की रिलैप्स से बचाव की योजना की बुनियाद हैं। अगर किसी दिन कोई ट्रिगर भारी पड़ जाए, तो उसे भी लिख लें। यह जानकारी है, नाकामी नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रिलैप्स के सबसे आम ट्रिगर कौन-से हैं?
मनोवैज्ञानिक एलन मार्लैट ने शराब से जुड़ी समस्याओं का इलाज करा चुके लोगों पर शोध किया। उसमें आधे से ज़्यादा रिलैप्स के पीछे ख़राब मूड और दूसरों से टकराव था। 20% से ज़्यादा मामलों में सामाजिक दबाव की भी भूमिका थी। जश्न और शराब से जुड़े संकेत, जैसे किसी ड्रिंक का विज्ञापन, भी तलब जगा सकते हैं।
अंदरूनी और बाहरी ट्रिगर में क्या फ़र्क़ है?
बाहरी ट्रिगर आपके बाहर होते हैं: किसी आदत से जुड़े लोग, जगहें, चीज़ें और दिन के ख़ास समय। अंदरूनी ट्रिगर आपके भीतर होते हैं: विचार, भावनाएँ और शरीर में होने वाले एहसास, जैसे खिंचाव।
ट्रिगर डायरी कितने दिन लिखनी चाहिए?
शुरुआत एक हफ़्ते से करें; NIAAA दो-एक हफ़्ते का सुझाव देता है। हफ़्ते के दिनों वाले पैटर्न दिखने में ज़्यादा समय लगता है, क्योंकि हर दिन हफ़्ते में सिर्फ़ एक बार आता है।
क्या ट्रिगर कभी ख़त्म होते हैं?
आम तौर पर वे कमज़ोर पड़ जाते हैं, लेकिन हो सकता है पूरी तरह ग़ायब न हों। NIAAA के अनुसार, समय और अभ्यास के साथ तलब की ताक़त घटती जाती है, इसलिए तेज़ ट्रिगर हल्के पड़ सकते हैं। जो ट्रिगर बने रहें, जैसे तनाव या पुरानी जगहें, उनके लिए अपनी अगर-तो योजनाएँ तैयार रखें।
हर दिन की सबसे तेज़ तलब लिखने के लिए, Guardian Angel आपको रोज़ अच्छा दिन या मुश्किल दिन वाला चेक-इन और उसके साथ एक छोटा नोट देता है, और अंतर्दृष्टि भी, जो हफ़्ते का आपका सबसे मुश्किल दिन बता सकती है। इसे डाउनलोड करना मुफ़्त है, और आपकी डायरी आपके फ़ोन पर ही रहती है।
अभी मदद पाएँ
- आपात स्थिति में: अगर आप ख़तरे में हैं या शारीरिक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे, या शराब या नशा छोड़ने के बाद भ्रम, मतिभ्रम या दौरे शुरू हों, तो 112 पर कॉल करें।
- अगर मन में आत्महत्या के ख़याल आ रहे हैं या सब कुछ बहुत भारी लग रहा है: टेली-मानस (Tele MANAS) को 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करें। यह भारत सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है: मुफ़्त, 24/7 और कई भाषाओं में।
- शराब या ड्रग्स से जुड़ी मदद के लिए: राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 (टोल-फ़्री)।
- धूम्रपान या तंबाकू छोड़ने के लिए: राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन 1800-11-2356 (टोल-फ़्री)।
- जुए या सट्टेबाज़ी से जुड़ी मदद के लिए: टेली-मानस 14416 (मुफ़्त, 24/7)।
- भारत से बाहर हैं? Find a Helpline पर देश के हिसाब से मुफ़्त और गोपनीय हेल्पलाइन मिल जाएँगी।