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नशा मुक्ति डायरी: अच्छे और मुश्किल दिनों के लिए जर्नलिंग के 40 सवाल

अच्छे और मुश्किल दिनों, तलब, चूक और पड़ावों के लिए नशा मुक्ति डायरी के 40 सवाल, और उन दिनों के लिए 2 मिनट का तरीक़ा, जब लिखना भारी लगे।

रिकवरी जर्नल प्रॉम्प्ट, यानी नशा मुक्ति की डायरी में लिखने के लिए छोटे-छोटे सवाल, जब कोरा पन्ना बहुत भारी लगे, तब शुरुआत का एक सिरा थमा देते हैं। नीचे ऐसे 40 सवाल हैं, इस हिसाब से बाँटे गए कि आपका दिन कैसा चल रहा है: अच्छे दिन, मुश्किल दिन, तलब, चूक, पड़ाव, और हफ़्ते भर पर एक नज़र।

किसी सदमे (ट्रॉमा) से उबर रहे हैं? दर्द भरी यादों के बारे में लिखने से मन में तेज़ भावनाएँ उठ सकती हैं। अगर आप ट्रॉमा या दुर्व्यवहार से जूझ रहे हैं, तो डायरी थेरेपिस्ट की मदद के साथ-साथ लिखें, उसके बदले में नहीं। अगर कभी भी आपको लगे कि आप सुरक्षित नहीं हैं, तो अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर संपर्क करें।

नशा मुक्ति में डायरी लिखने से मदद क्यों मिलती है

लिखने और सेहत पर हुआ ज़्यादातर शोध “एक्सप्रेसिव राइटिंग” पर आधारित है, यानी मन की बात खुलकर लिखने का वह तरीक़ा, जो मनोवैज्ञानिक जेम्स पेनेबेकर ने बनाया। इसमें लोग किसी तनाव भरी बात के बारे में 15 से 20 मिनट तक लिखते हैं, और ऐसा तीन से पाँच बार करते हैं। मनोचिकित्सा की एक समीक्षा बताती है कि सबसे पहले अध्ययन में, ऐसा करने वाले छात्रों ने अगले चार महीनों में हेल्थ सेंटर के कम चक्कर लगाए।

146 अध्ययनों के 2006 के एक विश्लेषण में पाया गया कि इसका फ़ायदा असली है, लेकिन छोटा। नशा मुक्ति केंद्र में रहकर इलाज करा रही 149 महिलाओं पर हुए एक ट्रायल में, दो हफ़्ते बाद एक्सप्रेसिव राइटिंग ने तुलना के लिए दिए गए काम के मुक़ाबले ट्रॉमा के लक्षण, डिप्रेशन और घबराहट (एंग्ज़ायटी) ज़्यादा कम किए। एक महीना होते-होते यह फ़र्क़ ख़त्म हो गया।

मनोचिकित्सा वाली समीक्षा दो सीमाएँ भी बताती है। दर्द भरी बातें लिखने के ठीक बाद अक्सर मन पहले से ज़्यादा भारी लगता है। और सिर्फ़ लिखने से आम तौर पर शराब पीने या ड्रग्स लेने की आदत नहीं बदलती।

इसलिए डायरी को इलाज नहीं, बल्कि अपनी बातों पर ग़ौर करने का एक ज़रिया मानें। रिलैप्स (पुरानी आदत पर लौटना) से बचाव के कार्यक्रमों में लोगों से कहा जाता है कि वे उन हालात, भावनाओं और लोगों का लगातार रिकॉर्ड रखें, जो उनकी तलब से जुड़े हैं। ट्रिगर डायरी ठीक यही करती है।

2 मिनट वाला नोट: किसी भी दिन के लिए रोज़ की छोटी-सी डायरी

जब पूरा पन्ना लिखना मुमकिन न लगे, तो बस तीन लाइनें लिखें:

  1. क्या हुआ? दिन की कोई एक ठोस बात।
  2. मुझे कैसा लगा? एक-दो शब्द, और 0 से 10 के बीच एक अंक।
  3. कल के लिए मेरा एक काम क्या है? इसे छोटा रखें।

किसी बुरे दिन यह कुछ ऐसा दिख सकता है: “बहन से बहस हुई। ग़ुस्सा, फिर उदासी, 7/10। कल: लंच के वक़्त टहलना।” बस, इतनी एंट्री पूरी है, और यही एक आसान मूड डायरी का काम भी कर देती है।

इसे अच्छे और मुश्किल, दोनों तरह के दिनों में लिखें, क्योंकि सिर्फ़ अच्छे दिनों का रिकॉर्ड आपके पैटर्न छिपा देता है। पढ़ें कि बुरे दिनों समेत, अपनी आदतों को अच्छी तरह ट्रैक कैसे करें

अच्छे दिनों के लिए डायरी के सवाल

अच्छे दिनों को लिख लें, ताकि मुश्किल दिनों में उन्हें दोबारा पढ़ सकें। ये सवाल रिकवरी के दौरान आभार डायरी (ग्रैटिट्यूड जर्नल) का काम भी करते हैं।

शराब से जुड़े विकार (अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर) का इलाज करा रहे 23 वयस्कों पर हुई एक छोटी पायलट स्टडी में, दो हफ़्ते तक रोज़ तीन अच्छी बातें लिखने से, तुलना वाले काम के मुक़ाबले मन की शांति का एहसास ज़्यादा बढ़ा। आठ हफ़्ते होते-होते यह फ़र्क़ ख़त्म हो चुका था।

  1. आज का दिन किस वजह से अच्छा रहा? अपना किया हुआ कोई एक काम लिखें।
  2. आज आपमें किस काम के लिए ऊर्जा थी?
  3. आज किसका साथ आपको अच्छा लगा?
  4. आज की तीन अच्छी बातें कौन-सी हैं, चाहे वे कितनी भी छोटी हों?
  5. आज किस पल आपको सबसे ज़्यादा लगा कि आप अपने असली रूप में हैं?
  6. जिस वक़्त आप आम तौर पर शराब या सिगरेट पीते, दाँव लगाते या फ़ोन पर स्क्रॉल करते, उस वक़्त आपने क्या किया?
  7. जब कोई मुश्किल दिन आएगा, तब आप आज के बारे में क्या याद रखना चाहेंगे?
  8. आज किस चीज़ से मदद मिली, जिसे आप कल फिर करना चाहेंगे?

मुश्किल दिनों के लिए डायरी के सवाल

मुश्किल दिन भी आपकी कहानी का हिस्सा है। ये सवाल उसे समझने में मदद करते हैं, उसके लिए ख़ुद को कोसने में नहीं। अगर मुश्किल दिन खिंचकर हफ़्तों की उदासी या नाउम्मीदी में बदल जाएँ, तो किसी डॉक्टर या थेरेपिस्ट को बताएँ।

किसी भावना को नाम देने से मदद मिल सकती है। दिमाग़ की इमेजिंग (स्कैन) वाले एक अध्ययन में, परेशान करने वाली तस्वीरों में दिख रही भावना को नाम देने से एमिग्डाला शांत हुआ, जो दिमाग़ के अलार्म सिस्टम का हिस्सा है।

  1. आज का दिन किस वजह से मुश्किल रहा? पहले जो हुआ वह लिखें, फिर जो महसूस हुआ।
  2. भावना को जितना हो सके, ठीक-ठीक नाम दें। घबराहट, अकेलापन, ऊब, शर्म, बेचैनी, किसी को खोने का ग़म?
  3. क्या आप भूखे हैं, ग़ुस्से में हैं, अकेलापन महसूस कर रहे हैं या थके हुए हैं? आज रात इनमें से किसी एक के लिए आप क्या कर सकते हैं?
  4. यह एहसास आपको शरीर में कहाँ महसूस होता है?
  5. आज आपने कौन-सी मुश्किल पार की?
  6. अगर किसी दोस्त का दिन आपके आज जैसा गुज़रा होता, तो आप उससे क्या कहते?
  7. कौन-सी सबसे छोटी चीज़ अगले एक घंटे को आसान बना सकती है?
  8. आज रात आप किसे एक छोटा-सा मैसेज भेज सकते हैं?

तलब के वक़्त डायरी: लिखते-लिखते तलब पार करने के 6 सवाल

तलब ऐसी लग सकती है, जैसे यह तब तक बढ़ती ही रहेगी, जब तक आप हार न मान लें। ऐसा नहीं होता। रिलैप्स से बचाव के कार्यक्रम “अर्ज सर्फ़िंग” सिखाते हैं: आप तलब को एक लहर की तरह देखते हैं, जो उठती है, चरम पर पहुँचती है और, अगर आप उसके कहे में न आएँ, तो उतर जाती है।

जब तक लहर गुज़रती है, लिखने से वह वक़्त कट जाता है। लिखने के लिए मन बहुत बेचैन है? बाहर निकल जाएँ या किसी को मैसेज करें।

  1. तलब को 0 से 10 के बीच अंक दें। फिर 10 मिनट का टाइमर लगाएँ और लिखते रहें।
  2. इसे किस चीज़ ने जगाया? कोई जगह, कोई व्यक्ति, कोई भावना, दिन का कोई वक़्त, कोई गंध?
  3. तलब आपसे क्या वादा कर रही है? और कौन-सी बात छिपा रही है?
  4. आगे की तस्वीर सोचें। अगर आप हार मान लें, तो आज की रात और कल की सुबह कैसी होगी?
  5. इस वक़्त आपको क्या चाहिए: आराम, खाना, किसी का साथ, तसल्ली या थोड़ा ब्रेक?
  6. तलब को फिर से अंक दें। लिखते-लिखते क्या बदला?

रिलैप्स या चूक के बाद डायरी के सवाल

चूक से जानकारी मिलती है, यह इस बात का सबूत नहीं कि आपसे यह नहीं होगा। रिलैप्स से बचाव का तरीक़ा सिखाता है कि लैप्स, यानी एक बार की चूक, को सीखने लायक़ ग़लती मानें, अपनी निजी नाकामी नहीं, ताकि एक चूक के पूरे रिलैप्स में बदलने की आशंका कम रहे। योजना के लिए पढ़ें: चूक के बाद फिर से पटरी पर कैसे लौटें

सबसे पहले सुरक्षा: कुछ समय दूर रहने के बाद, ओपिओइड की आपकी पुरानी मात्रा से ओवरडोज़ हो सकता है। अगर आप फिर से बहुत ज़्यादा शराब पीने लगे हैं, तो अचानक छोड़ना ख़तरनाक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से पूछें।

  1. सिलसिलेवार क्या-क्या हुआ? आप कहाँ थे, वहाँ कौन था, और आपने ख़ुद से क्या कहा?
  2. वह पहला पल कौन-सा था, जब आप कुछ और चुन सकते थे?
  3. उस ड्रिंक, सिगरेट, दाँव या स्क्रॉलिंग से आपको क्या मिलने की उम्मीद थी?
  4. उसके बाद से आप ख़ुद से क्या कहते आए हैं? क्या वह सच है, या शर्म बोल रही है?
  5. अगर फिर से वैसी स्थिति आए, तो उसकी जगह आप ठीक-ठीक क्या करेंगे?
  6. ऐसा क्या है जो अब भी आपके पास है, और जिसे यह चूक छीन नहीं पाई?

पड़ावों के लिए डायरी के सवाल

नशा मुक्ति के पड़ाव मनाने लायक़ होते हैं। लेकिन जश्न कैसे मनाएँगे, इसकी योजना पहले से बना लें: रिलैप्स से बचाव पर हुआ शोध अच्छे मूड, जैसे जश्न के मौक़ों, को भी जोखिम भरी स्थितियों में गिनता है।

  1. पहले दिन के मुक़ाबले अब क्या अलग है: नींद, सुबहें, पैसे, लोग?
  2. अब तक का सबसे मुश्किल पल कौन-सा था, और आपने उसे कैसे पार किया?
  3. छोड़ने के बारे में आपकी कौन-सी धारणा ग़लत निकली?
  4. यहाँ तक पहुँचने में किसने आपकी मदद की, और क्या आपने उन्हें यह बताया है?
  5. आप जश्न कैसे मनाएँगे, ताकि वह उस ज़िंदगी से मेल खाए जो आप बना रहे हैं?
  6. अगले पड़ाव तक आप अपनी ज़िंदगी में क्या सच होते देखना चाहते हैं?

हफ़्ते भर की समीक्षा के सवाल

हफ़्ते में एक बार अपनी एंट्री दोबारा पढ़ें और पैटर्न खोजें। अपने जोखिम भरे दिन और समय जान लेने से आप उनके लिए पहले से योजना बना सकते हैं।

  1. इस हफ़्ते कितने अच्छे दिन रहे और कितने मुश्किल?
  2. कौन-सा दिन या दिन का कौन-सा समय सबसे मुश्किल रहा? क्या पिछले हफ़्ते भी ऐसा ही था?
  3. कौन-सा ट्रिगर सबसे ज़्यादा बार सामने आया?
  4. इस हफ़्ते किस चीज़ से सबसे ज़्यादा मदद मिली?
  5. किस चीज़ ने आपको अंदर से थका दिया, और क्या आप उसे बदल सकते हैं?
  6. अगले हफ़्ते आप कौन-सी एक चीज़ आज़माएँगे?

अपनी नशा मुक्ति डायरी को निजी कैसे रखें

जब आपको पता हो कि इसे कोई और नहीं पढ़ेगा, तो आप ज़्यादा ईमानदारी से लिख पाएँगे।

  • कॉपी या डायरी किसी निजी जगह पर रखें, या पासकोड वाले फ़ोन का इस्तेमाल करें।
  • लोगों और जगहों के लिए नाम के पहले अक्षर या कोई कोड वर्ड लिखें।
  • अगर कोई पन्ना इतना चुभने वाला लगे कि उसे रखना ठीक न लगे, तो उसे फाड़ देना या डिलीट कर देना बिल्कुल ठीक है।

फ़ोन पर डायरी रखनी हो, तो Guardian Angel में हर दिन के चेक-इन के साथ नोट्स की जगह मिलती है, जिसमें 100 अक्षर लिखे जा सकते हैं (Premium के साथ 1,000), जो 2 मिनट वाले नोट के लिए काफ़ी है। नोट्स आपके डिवाइस पर ही रहते हैं, अंतर्दृष्टि में इसी दिन वाला हिस्सा दिखाता है कि पिछले महीनों में इसी तारीख़ को आपने क्या लिखा था, और बैकअप एक्सपोर्ट करें से एक कॉपी ऐसी फ़ाइल में सेव हो जाती है, जिसे आप अपने पास रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नशा मुक्ति की डायरी लिखना कैसे शुरू करें?

ऐसा तरीक़ा चुनें जिसे आप सच में इस्तेमाल करेंगे, जैसे कोई सस्ती-सी कॉपी या आपका फ़ोन, और एक तय समय, जैसे सोने से पहले। तीन लाइनों से शुरुआत करें: क्या हुआ, आपको कैसा लगा, और कल आप कौन-सा एक काम करेंगे। जब कहने को ज़्यादा हो, तब कोई लंबा सवाल भी जोड़ लें।

नशे से दूर रहने की डायरी में क्या लिखें?

लिखें कि क्या हुआ, आपको कैसा लगा और किस चीज़ से मदद मिली। ट्रिगर, तलब, छोटी-छोटी जीतें और वे लोग जिनके आप शुक्रगुज़ार हैं, ये सब लिखने के अच्छे विषय हैं। कोई भी एंट्री ग़लत नहीं होती।

क्या डायरी लिखना (जर्नलिंग) लत से उबरने में मदद करता है?

एक्सप्रेसिव राइटिंग पर हुए अध्ययन सेहत और मूड के लिए छोटे फ़ायदे दिखाते हैं, और नशे के इलाज के दौरान हुए एक ट्रायल में थोड़े समय के लिए सुधार देखा गया। फिर भी, सिर्फ़ लिखने से आम तौर पर शराब पीने या ड्रग्स लेने की आदत नहीं बदलती। इसे पैटर्न और ट्रिगर पहचानने के लिए इस्तेमाल करें, और साथ में दूसरी मदद भी लें, जैसे काउंसलिंग या कोई आपसी सहायता समूह।

रिकवरी के दौरान कितनी बार डायरी लिखें?

अगर आप इसे छोटा रखें, तो रोज़ लिखना अच्छा रहता है: छोटा नोट नियम से लिखते रहना आसान होता है। पैटर्न पहचानने के लिए हफ़्ते में एक बार समीक्षा भी करें। अगर कुछ दिन छूट जाएँ, तो बस आज से फिर शुरू कर दें।

अगर डायरी लिखने से मन और ख़राब हो जाए, तो क्या करें?

किसी दर्द भरी बात के बारे में लिखने के ठीक बाद परेशान महसूस करना आम है। नशे का इलाज करा रही महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में, अगले दिन तक यह एहसास उतर चुका था। अगर यह बना रहे, या लिखते हुए कोई सदमा (ट्रॉमा) या नाउम्मीदी उभर आए, तो किसी थेरेपिस्ट या डॉक्टर से बात करें। अगर आपके मन में ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने के ख़याल आ रहे हैं, तो अभी किसी क्राइसिस हेल्पलाइन या अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर संपर्क करें।


अगर आप अपने 2 मिनट वाले नोट के लिए एक निजी जगह चाहते हैं, तो Guardian Angel आपको शराब और किसी भी दूसरी आदत के लिए नोट के साथ रोज़ का चेक-इन देता है। इसे डाउनलोड करना मुफ़्त है, और आपके नोट्स आपके फ़ोन पर ही रहते हैं।

अभी मदद पाएँ

  • आपात स्थिति में: अगर आप ख़तरे में हैं या शारीरिक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे, या शराब या नशा छोड़ने के बाद भ्रम, मतिभ्रम या दौरे शुरू हों, तो 112 पर कॉल करें।
  • अगर मन में आत्महत्या के ख़याल आ रहे हैं या सब कुछ बहुत भारी लग रहा है: टेली-मानस (Tele MANAS) को 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करें। यह भारत सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है: मुफ़्त, 24/7 और कई भाषाओं में।
  • शराब या ड्रग्स से जुड़ी मदद के लिए: राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 (टोल-फ़्री)।
  • धूम्रपान या तंबाकू छोड़ने के लिए: राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन 1800-11-2356 (टोल-फ़्री)।
  • जुए या सट्टेबाज़ी से जुड़ी मदद के लिए: टेली-मानस 14416 (मुफ़्त, 24/7)।
  • भारत से बाहर हैं? Find a Helpline पर देश के हिसाब से मुफ़्त और गोपनीय हेल्पलाइन मिल जाएँगी।

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