ब्लॉग पर वापस जाएँ

ब्लॉग

नशे से दूर रहने में वीकेंड सबसे मुश्किल क्यों होते हैं: अपने जोखिम भरे दिन और समय कैसे पहचानें

तलब अक्सर वीकेंड, शाम और सैलरी वाले दिनों में ज़ोर पकड़ती है। जानें ऐसा क्यों होता है, अपने जोखिम भरे दिन कैसे पहचानें और उनके लिए पहले से योजना कैसे बनाएँ।

नशे से दूर रहने के लिए वीकेंड अक्सर सबसे मुश्किल वक़्त होता है, और इसकी साफ़ वजहें हैं। ये कुछ ही दिनों में कई जोखिम एक साथ ले आते हैं: खाली समय, आसपास लोगों का ज़्यादा पीना या दाँव लगाना, हफ़्ते भर की थकान, और एक ऐसा दिमाग़ जिसने शुक्रवार की रात इनाम की उम्मीद करना सीख लिया है। शामें, सैलरी वाले दिन और त्योहार-छुट्टियाँ भी इसी तरह असर करते हैं।

जब आप अपने जोखिम भरे समय को पहचान लेते हैं, तो उनके लिए पहले से योजना बना सकते हैं।

अभी शाम भारी पड़ रही है? कुछ खा लें, किसी भरोसेमंद इंसान को मैसेज करें, और तलब को 10 मिनट दें। तलब लहर की तरह उठती है और गुज़र जाती है।

हाल ही में बहुत ज़्यादा या रोज़ शराब पीना छोड़ा है? पसीना आना, घबराहट या हल्की कँपकँपी सिर्फ़ तलब नहीं, बल्कि विड्रॉल के लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लें। साफ़ दिखने वाली कँपकँपी, भ्रम, मतिभ्रम (जो नहीं है, उसे देखना या सुनना) या दौरा पड़ने पर तुरंत आपातकालीन इलाज की ज़रूरत है।

जोखिम भरे आम दिन और समय

ये आम रुझान हैं, पक्के नियम नहीं।

वीकेंड पर नशे से दूर रहना सबसे मुश्किल क्यों होता है

खाली समय और ऊब

हफ़्ते के दिन काम से भरे रहते हैं। खाली शनिवार ऊब के लिए जगह छोड़ देता है। मनोवैज्ञानिक एलन मार्लैट के रिलैप्स (पुरानी आदत पर लौट जाना) के एक जाने-माने मॉडल में, ऊब, बेचैनी और झुंझलाहट जैसी मुश्किल भावनाएँ सबसे ज़्यादा रिलैप्स से जुड़ी हैं।

लोगों का साथ और सामाजिक दबाव

वीकेंड पर दोस्तों की महफ़िल जमती है और गिलास भरे जाते हैं। युवाओं वाली स्टडी में, जिन लोगों को उम्मीद थी कि शराब से मेल-जोल बेहतर हो जाता है, उनके पीने में वीकेंड पर ज़्यादा उछाल दिखा। मार्लैट के शोध में पाया गया कि 20% से ज़्यादा रिलैप्स में सामाजिक दबाव की भूमिका थी, जिसमें सिर्फ़ पीने वाले लोगों के बीच होना भी शामिल है।

शाम की तलब और हफ़्ते भर की थकान

शाम तक, और ख़ासकर शुक्रवार को, बहुत से लोग थककर चूर हो जाते हैं। भूख, तनाव और थकान की वजह से तलब को झेलकर गुज़र जाने देना और मुश्किल हो सकता है, इसलिए भूख, ग़ुस्से, अकेलेपन और थकान की झटपट HALT जाँच आज़माएँ।

शुक्रवार रात की ड्रिंक: दिमाग़ का सीखा हुआ इनाम

अगर सालों तक शुक्रवार की रात का मतलब एक ड्रिंक या एक दाँव रहा है, तो आपके दिमाग़ ने उसकी उम्मीद करना सीख लिया है। अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज़ बताता है कि रोज़मर्रा के जो संकेत सेवन से जुड़ गए हैं, वे तलब जगा सकते हैं, तब भी जब वह चीज़ आसपास न हो। काम के हफ़्ते का ख़त्म होना भी ऐसा ही एक संकेत बन सकता है।

हफ़्ते के दिनों में अपना पैटर्न कैसे खोजें

हो सकता है आपका सबसे मुश्किल दिन मंगलवार हो, या वह शाम जब आप परिवार से मिलकर लौटते हैं। यह पता करने के लिए, 3 से 4 हफ़्ते तक ईमानदारी से चेक-इन करें।

  1. दिन में एक बार चेक-इन करें। हर दिन को अच्छा या मुश्किल के रूप में दर्ज करें, तब भी जब मन उसे छोड़ देने का हो। मुश्किल दिन आपको सबसे ज़्यादा सिखाते हैं।
  2. कुछ शब्द जोड़ें। समय लिखें, आप कहाँ थे, किसके साथ थे और कैसा महसूस कर रहे थे। जैसे: “शुक्रवार, शाम 6 बजे, घर पर अकेले, थकान, तेज़ तलब।”
  3. सिर्फ़ चूक नहीं, तलब भी लिखें। अच्छे दिन में भी रात 9 बजे तेज़ तलब लग सकती है।
  4. दोहराव खोजें। वही दिन, वही घंटा, वही जगह या वही भावना, या फिर सैलरी आने के ठीक बाद का समय।

ज़्यादा विस्तार से जानने के लिए, एक डायरी की मदद से अपने ट्रिगर पहचानें। पक्का नहीं कि रिकॉर्ड रखना फ़ायदेमंद है? पढ़ें कि आदतों पर नज़र रखने के बारे में शोध क्या कहता है

अगर आप Guardian Angel इस्तेमाल करते हैं, तो अंतर्दृष्टि में हफ़्ते के दिन से वाला कार्ड किसी दिन को सबसे मुश्किल या सबसे आसान के रूप में चिह्नित कर सकता है, जब हफ़्ते के उस दिन के 3 चेक-इन हो जाएँ और वह बाक़ी दिनों से अलग नज़र आए। इस लेबल को एक सवाल की तरह लें: उस दिन क्या अलग होता है?

अपने सबसे मुश्किल दिन के लिए योजना कैसे बनाएँ

अमेरिका की सरकारी संस्था NIAAA लोगों, जगहों और चीज़ों के साथ-साथ दिन के अलग-अलग समय को भी ट्रिगर मानती है। उसकी सलाह है कि जहाँ हो सके, लुभाने वाले हालात से बचें, और जिनसे न बच सकें, उनके लिए पहले से योजना बनाएँ। अपने सबसे मुश्किल समय को अपनी रिलैप्स से बचाव की योजना में जोड़ें।

  • उस समय को कोई ढाँचा दें। जिस घंटे आम तौर पर तलब उठती है, उसके लिए कुछ तय कर लें: सैर, किसी से फ़ोन पर बात या खाना।
  • रूटीन बदलें। अगर शुक्रवार शाम 6 बजे का मतलब बार या ठेके पर जाना था, तो उस वक़्त कहीं और रहें। NIAAA यह भी सुझाती है कि घर में शराब बहुत कम रखें या बिल्कुल न रखें।
  • मदद पहले से तय रखें। किसी एक इंसान से कह दें: “शुक्रवार की शामें मेरे लिए मुश्किल होती हैं। उस वक़्त तुम्हें मैसेज करूँ तो चलेगा?” अगर आप AA, SMART Recovery या Gamblers Anonymous जैसे आपसी मदद वाले समूहों की मीटिंग में जाते हैं, तो अपने मुश्किल दिन वाली कोई मीटिंग चुनें।
  • पैसा आने वाले दिन को सुरक्षित रखें। ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा NHS सुझाव देती है कि सैलरी वाले दिन जुआ खेलने से पहले ही ज़रूरी बिल चुका दें, उनके लिए ऑटो-पेमेंट सेट कर दें, और अपने बैंक से कहें कि वह जुए की साइटों और ऐप्स पर होने वाले पेमेंट रोक दे।

नशे के बिना वीकेंड बिताने के 20 आइडिया

शुक्रवार की रात

  1. कुछ नया पकाएँ।
  2. कोई बढ़िया-सा मॉकटेल या मसाला शिकंजी बनाएँ।
  3. कोई फ़िल्म, कॉन्सर्ट या स्टैंड-अप कॉमेडी शो देखने जाएँ।
  4. शाम की कोई क्लास आज़माएँ: क्लाइंबिंग, मिट्टी के बर्तन बनाना या डांस।
  5. घर पर दोस्तों के साथ लूडो, कैरम या बोर्ड गेम की शाम रखें।
  6. जल्दी सो जाएँ और शनिवार की सुबह का पूरा मज़ा लें।

शनिवार

  1. सुबह-सुबह हाइकिंग या ट्रेकिंग पर निकलें।
  2. अपने इलाक़े के किसी रनिंग ग्रुप से जुड़ें।
  3. किसी म्यूज़ियम, हाट या बाज़ार में घूमने जाएँ।
  4. तैरें, साइकिल चलाएँ या जिम जाएँ।
  5. कुछ घंटे किसी नेक काम के लिए वॉलंटियर करें।
  6. कोई काम हाथ में लें: पेंट करना, कुछ ठीक करना, पौधे लगाना।
  7. किसी दोस्त से पीने के लिए नहीं, चाय-नाश्ते पर मिलें।
  8. आसपास कहीं एक दिन की ट्रिप पर जाएँ।

रविवार

  1. किसी सहायता समूह की मीटिंग में जाएँ।
  2. हफ़्ते भर के लिए कुछ खाना पहले से बनाकर रख लें।
  3. किसी कैफ़े में बैठकर पढ़ें या डायरी लिखें।
  4. अगले वीकेंड के लिए अपने लिए कोई छोटी-सी ख़ुशी तय करें।
  5. सुबह आराम से, बिना ख़ुद को कोसे बिताएँ।
  6. शाम 4 बजे एक छोटा “रीसेट” करें: घर समेटें, आगे की योजना बनाएँ, आराम करें।

त्योहारों और ख़ास मौक़ों पर नशे से दूर रहने के टिप्स

त्योहारों और छुट्टियों में वीकेंड के सारे जोखिम एक साथ आ जाते हैं: काम से छुट्टी, पार्टियाँ, परिवार का तनाव, और हर तरफ़ शराब।

  • पहुँचने और निकलने का समय जाने से पहले ही तय कर लें।
  • अपना बिना शराब वाला ड्रिंक साथ ले जाएँ, लेकिन अगर बिना अल्कोहल वाली बियर या वाइन से तलब जागती हो, तो उनसे दूर रहें।
  • एक छोटा-सा जवाब तैयार रखें, जैसे “बस, मैं ठीक हूँ, शुक्रिया।”
  • किसी साथी को साथ ले जाएँ, या किसी ऐसे इंसान को तैयार रखें जिसे आप मैसेज कर सकें।
  • बड़े मैच वाले दिनों को भी त्योहार जैसा ही मानें, अगर स्पोर्ट्स बेटिंग आपकी आदत है, फिर चाहे वह IPL हो या कोई बड़ा क्रिकेट मुक़ाबला।

अगर कोई त्योहार ठीक से न गुज़रे, तो पूरे त्योहारी मौसम को हाथ से गया न समझें। अगली बार के लिए योजना में बदलाव करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वीकेंड पर नशे से दूर रहना सबसे ज़्यादा मुश्किल क्यों लगता है?

वीकेंड में खाली समय, मेल-जोल के मौक़े, हफ़्ते भर की थकान और शुक्रवार-शनिवार की रातों से जुड़ी पुरानी आदतें, सब एक साथ आ जाते हैं। रोज़ के पीने के रिकॉर्ड पर हुई स्टडीज़ में वीकेंड पर ज़्यादा शराब पीना देखा गया है, युवाओं में भी और शराब के सेवन से जुड़े विकार वाले लोगों में भी।

ज़्यादातर रिलैप्स कब होते हैं?

रिलैप्स का पैटर्न हर इंसान और हर आदत के साथ अलग होता है। NIAAA के अनुसार, दोबारा पीने की संभावना सबसे ज़्यादा तनाव के दौरान होती है, या तब, जब आप उन लोगों और जगहों के आसपास हों जो पहले के पीने से जुड़े हैं। बहुत से लोगों के लिए इसका मतलब है शामें, वीकेंड और छुट्टियाँ। धूम्रपान के मामले में, अपने दम पर छोड़ने वाले लोगों पर हुई एक समीक्षा में पाया गया कि ज़्यादातर रिलैप्स पहले 8 दिनों के अंदर हुए

रिलैप्स के लिए जोखिम भरे हालात कौन-से होते हैं?

रिलैप्स से बचाव पर हुए शोध में, ये वे पल हैं जब ख़ुद को सँभालना सबसे मुश्किल होता है। बहुत से लोगों के लिए ये एक तय समय-सारणी पर आते हैं: शामें, वीकेंड, सैलरी वाले दिन और त्योहार-छुट्टियाँ। मुश्किल भावनाएँ, किसी से टकराव और सामाजिक दबाव जोखिम को और बढ़ा देते हैं।

अपना पैटर्न देखने के लिए कितने समय तक रिकॉर्ड रखना चाहिए?

कम से कम 3 से 4 हफ़्ते। हफ़्ते का हर दिन हफ़्ते में सिर्फ़ एक बार आता है, इसलिए कई हफ़्ते लगते हैं, तब जाकर कोई एक दिन संयोग से हटकर, सच में अलग नज़र आता है।


यह देखने के लिए कि कौन-से दिन आपके लिए सबसे मुश्किल हैं, Guardian Angel आपको रोज़ अच्छा दिन या मुश्किल दिन वाला चेक-इन देता है और अंतर्दृष्टि में हफ़्ते के दिनों के हिसाब से आपके पैटर्न दिखाता है। इसे डाउनलोड करना मुफ़्त है, और आपकी डायरी आपके फ़ोन पर ही रहती है।

अभी मदद पाएँ

  • आपात स्थिति में: अगर आप ख़तरे में हैं या शारीरिक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे, या शराब या नशा छोड़ने के बाद भ्रम, मतिभ्रम या दौरे शुरू हों, तो 112 पर कॉल करें।
  • अगर मन में आत्महत्या के ख़याल आ रहे हैं या सब कुछ बहुत भारी लग रहा है: टेली-मानस (Tele MANAS) को 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करें। यह भारत सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है: मुफ़्त, 24/7 और कई भाषाओं में।
  • शराब या ड्रग्स से जुड़ी मदद के लिए: राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 (टोल-फ़्री)।
  • धूम्रपान या तंबाकू छोड़ने के लिए: राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन 1800-11-2356 (टोल-फ़्री)।
  • जुए या सट्टेबाज़ी से जुड़ी मदद के लिए: टेली-मानस 14416 (मुफ़्त, 24/7)।
  • भारत से बाहर हैं? Find a Helpline पर देश के हिसाब से मुफ़्त और गोपनीय हेल्पलाइन मिल जाएँगी।

क्या आदतों को ट्रैक करना सच में काम करता है? सेल्फ़-मॉनिटरिंग पर शोध क्या कहता है

क्या आदतों को ट्रैक करना सच में मदद करता है? जानें सेल्फ़-मॉनिटरिंग पर शोध क्या कहता है, यह क्यों काम करती है, कब उल्टी पड़ती है और सही तरह ट्रैक कैसे करें।

नशे की तलब के ट्रिगर कैसे पहचानें (एक आसान ट्रिगर डायरी के साथ, जिसे आप आज ही शुरू कर सकते हैं)

ट्रिगर यूँ ही नहीं आते। एक हफ़्ते की इस ट्रिगर डायरी से पहचानें कि किन लोगों, जगहों, भावनाओं और समय पर आपको तलब लगती है, फिर उनसे निपटने की योजना बनाएँ।

रिलैप्स से बचाव की योजना कैसे लिखें (मुफ़्त टेम्पलेट और उदाहरणों के साथ)

मुफ़्त टेम्पलेट से एक पन्ने की रिलैप्स से बचाव की योजना बनाएँ: चेतावनी के संकेत, ट्रिगर, तलब से निपटने के क़दम और मदद के संपर्क, उदाहरणों के साथ।