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लैप्स और रिलैप्स में फ़र्क़: चूक के बाद पहले 24 घंटों में क्या करें
एक चूक आपकी मेहनत पर पानी नहीं फेरती। जानें कि लैप्स और रिलैप्स में क्या फ़र्क़ है, और नशा छोड़ने के बाद चूक हो जाए तो अगले 24 घंटों में क्या करें।
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लैप्स यानी एक बार की चूक: कुछ समय दूर रहने के बाद एक ड्रिंक, एक सिगरेट या एक दाँव। रिलैप्स यानी पुराने ढर्रे पर लौट आना। एक चूक उन दिनों को नहीं मिटाती जो आप पहले ही पार कर चुके हैं, और अगले 24 घंटों में आप क्या करते हैं, उससे तय हो सकता है कि बात किस ओर जाएगी।
सबसे पहले सुरक्षा। ओपिओइड से कुछ समय दूर रहने के बाद आपका शरीर पहले वाली मात्रा का आदी नहीं रहता, और NIDA चेतावनी देता है कि उतनी मात्रा लेने से आसानी से ओवरडोज़ हो सकता है। WHO ओपिओइड को शराब या सेडेटिव (नींद लाने या शांत करने वाली दवाओं) के साथ मिलाने को एक और ख़तरा बताता है।
अकेले में न लें, और हो सके तो नालोक्सोन पास रखें। यह एक दवा है जो ओपिओइड के ओवरडोज़ का असर पलट सकती है। नीले होंठ, धीमी या रुकी हुई साँस, या जगाने पर भी न जागना ओवरडोज़ के संकेत हैं: अपने आपातकालीन नंबर पर कॉल करें और नालोक्सोन हो तो उसे दें।
नाल्ट्रेक्सोन या डाइसल्फ़िरैम ले रहे हैं? आज ही अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट को इस चूक के बारे में बताएँ। SAMHSA चेतावनी देता है कि नाल्ट्रेक्सोन लेते समय ओपिओइड की पहले से कम खुराक भी जानलेवा हो सकती है।
अगर एक चूक कई दिनों तक भारी मात्रा में पीने में बदल गई है, तो दोबारा छोड़ने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। NHS के अनुसार अगर आपका शरीर शराब पर निर्भर हो गया है, तो अचानक छोड़ना बहुत ख़तरनाक हो सकता है। छोड़ने के बाद पसीना आना, घबराहट या दिल की धड़कन तेज़ होना इस बात के संकेत हैं कि यह मदद लेनी चाहिए।
अगर छोड़ने के बाद साफ़ दिखने वाली कँपकँपी हो, उलझन हो, ऐसी चीज़ें दिखें जो असल में नहीं हैं, या दौरा पड़े, तो तुरंत अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें। पीने के बाद साँस धीमी पड़ जाए या कोई बेहोश हो जाए, तब भी यही करें, क्योंकि ये अल्कोहल पॉइज़निंग (शराब के ज़हर) के संकेत हैं।
लैप्स और रिलैप्स: एक घटना या पुराना ढर्रा
मनोवैज्ञानिक एलन मार्लैट के रिलैप्स से बचाव के मॉडल की एक समीक्षा यह रेखा कुछ इस तरह खींचती है:
- लैप्स एक घटना है। किसी शादी में एक पेग। किसी पार्टी में वेप का एक कश। किसी क्रिकेट मैच पर एक दाँव।
- रिलैप्स एक ढर्रा है। चूक फिर से आदत बन जाती है, या आप कोशिश करना छोड़ देते हैं।
मार्लैट और उनके साथियों की बाद की एक समीक्षा लैप्स को बंद गली नहीं, बल्कि “सड़क का दोराहा” कहती है। लैप्स से रिलैप्स का ख़तरा सच में बहुत बढ़ जाता है, लेकिन इससे रिलैप्स तय नहीं हो जाता।
एब्स्टिनेंस वायलेशन इफ़ेक्ट: रिलैप्स की शर्म कैसे और नीचे खींच सकती है
नशा छोड़ने के बाद चूक हो जाए, तो बहुत से लोग सोचते हैं: “सब तो बिगड़ ही गया, अब रुकने का क्या फ़ायदा।” मार्लैट ने इसे एब्स्टिनेंस वायलेशन इफ़ेक्ट कहा, यानी संयम टूटने का असर।
आप चूक की क्या वजह मानते हैं, यह मायने रखता है। पहली समीक्षा के अनुसार जो लोग अपनी किसी स्थायी कमी को दोष देते हैं (“मुझमें इच्छाशक्ति ही नहीं है”), उनके हार मानने की संभावना उन लोगों से ज़्यादा होती है जो इसे बस एक ऐसी स्थिति मानते हैं जिसके लिए वे तैयार नहीं थे।
सबूत मिले-जुले हैं, लेकिन दो नतीजे ख़ास तौर पर ध्यान खींचते हैं। धूम्रपान छोड़ रहे 133 लोगों पर हुए एक अध्ययन में, जिनका पहली चूक के बाद हार मान लेने का मन हुआ, उनसे दोबारा चूक जल्दी हुई। जिन्होंने तुरंत संभलने के लिए कुछ किया, उनके उसी दिन दोबारा चूकने की संभावना कम थी। 42 अध्ययनों की 2019 की एक समीक्षा में पाया गया कि शर्म महसूस करने वालों में अक्सर अगले कुछ घंटों या दिनों में सेवन ज़्यादा रहा, हालाँकि हर बार ऐसा नहीं था।
इसलिए अपनी कहानी बदलकर देखें:
- “मेरा कुछ नहीं हो सकता” की जगह यह कहकर देखें: “ऑफ़िस पार्टी से निकलने का मेरे पास कोई प्लान नहीं था।”
- “मैंने सब बर्बाद कर दिया” की जगह यह कहकर देखें: “आज की रात मुश्किल थी, और इससे मुझे कुछ सीखने को मिल सकता है।”
चूक या रिलैप्स के बाद क्या करें: पहला घंटा
अगर आप सोच रहे हैं, “रिलैप्स हो गया, अब क्या करूँ?”, तो यहाँ से शुरू करें।
- रुकें और सुरक्षित हो जाएँ। गिलास या सिगरेट नीचे रख दें, या बेटिंग ऐप बंद कर दें। अगर सुरक्षित रूप से निकल सकें, तो वहाँ से निकल जाएँ। अगर आपने पी है या कोई नशा किया है, तो गाड़ी न चलाएँ।
- उसे अपनी पहुँच से हटा दें। बची हुई शराब बहा दें, पैकेट फेंक दें, या अकाउंट से लॉग आउट कर लें। धूम्रपान छोड़ रहे लोगों पर हुए एक अध्ययन में पहली चूक तब ज़्यादा हुई, जब सिगरेट आसानी से मिल रही थी और आसपास दूसरे लोग भी पी रहे थे।
- किसी से संपर्क करें। किसी एक भरोसेमंद इंसान को मैसेज करें: “आज रात मुझसे चूक हो गई। मैं सुरक्षित हूँ। क्या हम कल बात कर सकते हैं?” मैसेज करने के लिए कोई नहीं है? इस पेज के आख़िर में दी गई हेल्पलाइनें इसके लिए भी हैं।
पहली शाम: खाना, पानी, नींद, और कोई बड़ा फ़ैसला नहीं
- सादा और ढंग का खाना खाएँ।
- पानी पिएँ, ख़ासकर शराब के बाद।
- जल्दी सो जाएँ।
- कोई बड़ा फ़ैसला न लें। आज रात यह तय न करें कि “अब कोशिश करना बेकार है”, और कोई कड़े नए नियम न बनाएँ। फ़ैसला कल करें।
आज रात तलब लौट सकती है। यहाँ पढ़ें कि तलब कितनी देर रहती है और उसे कैसे गुज़र जाने दें।
अगली सुबह: ख़ुद को दोष दिए बिना समीक्षा
नींद पूरी होने के बाद पीछे मुड़कर देखें, किसी जज की तरह नहीं, एक जासूस की तरह। छोटे-छोटे जवाब लिखें:
- क्या हुआ, और आपने कितना लिया?
- कब शुरू हुआ? कौन-सा दिन था, कितने बजे थे?
- कहाँ थे आप?
- कौन साथ था, या आप अकेले थे?
- कैसा महसूस हो रहा था उससे ठीक पहले? तनाव, ऊब, अकेलापन, या किसी ख़ुशी का जश्न?
- क्या मदद करेगा अगली बार?
और सवालों के लिए चूक के बाद डायरी में लिखने के ये सवाल आज़माएँ।
रिलैप्स के बाद फिर से पटरी पर कैसे लौटें
मार्लैट का मॉडल चूक को इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि कुछ नया सीखते समय होने वाली एक आम ग़लती मानता है। यह इस बात का संकेत है कि उस स्थिति के लिए आपको बेहतर योजना चाहिए।
सुबह के अपने जवाबों की मदद से एक-दो चीज़ें बदलें:
- अगर बात शुक्रवार शाम ऑफ़िस के बाद की ड्रिंक्स की थी, तो वहाँ से निकलने के लिए एक तैयार वाक्य और घर लौटने का इंतज़ाम पहले से तय कर लें।
- अगर वजह किसी बहस के बाद का तनाव था, तो अपनी योजना में एक ऐसा इंसान जोड़ें जिसे आप फ़ोन कर सकें।
इसे लिख लें, और साथ में यह भी कि चूक होने पर कौन-से कदम उठाने हैं। मार्लैट के मॉडल से काम करने वाले थेरेपिस्ट अक्सर यही करते हैं। यहाँ पढ़ें कि रिलैप्स से बचाव की योजना कैसे बनाएँ।
अगर चूक एक ढर्रा बन चुकी है, तो कम नहीं, ज़्यादा सहारा लें। NIDA के अनुसार रिलैप्स इस बात का संकेत है कि आप अपने डॉक्टर से इलाज दोबारा शुरू करने, उसमें बदलाव करने या कोई दूसरा इलाज अपनाने के बारे में बात करें।
फिर से शुरुआत: आपकी अब तक की प्रगति अब भी मायने रखती है
“फिर से पहला दिन” शून्य जैसा लग सकता है। पर ऐसा है नहीं। अगर 30 दिन बाद आपसे रिलैप्स हुआ, तब भी आपने वे 30 दिन जिए हैं। आपने जाना कि कौन-से घंटे मुश्किल थे और किस चीज़ ने आपको उनसे पार निकाला।
काउंटर रीसेट करना है या नहीं, यह आपका फ़ैसला है। यहाँ पढ़ें कि चूक के बाद अपने नशा-मुक्त दिनों का काउंटर रीसेट करें या नहीं, यह कैसे तय करें।
Guardian Angel में आप उस दिन को मुश्किल दिन के रूप में दर्ज कर सकते हैं। इससे वर्तमान स्ट्रीक ख़त्म हो जाती है, लेकिन आपकी अधिकतम स्ट्रीक, कैलेंडर और बैज का इतिहास बने रहते हैं। मुश्किल दिन भी आपकी कहानी का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या एक बार पी लेने से रिलैप्स हो जाता है?
आमतौर पर नहीं। रिलैप्स से बचाव पर हुए शोध में, कुछ समय तक न पीने के बाद एक ड्रिंक लेना लैप्स माना जाता है। यह रिलैप्स तब बनता है, जब यह आपके पुराने ढर्रे में बदल जाए या आप अपना लक्ष्य छोड़ दें। आगे आप क्या करते हैं, उससे तय हो सकता है कि बात किस ओर जाएगी।
क्या एक चूक मेरे दिमाग़ को रीसेट कर देती है?
इस मायने में नहीं कि आपकी प्रगति मिट जाए। सीखी हुई आदतें कैसे कमज़ोर पड़ती हैं, इस पर एक शोध-समीक्षा, जो ज़्यादातर जानवरों पर हुए अध्ययनों पर आधारित है, बताती है कि नई सीख, जैसे बिना पिए गुज़री शामें, पुरानी आदत की जगह नहीं लेती, बल्कि उसके साथ-साथ दर्ज रहती है। माहौल, जिसमें नशे की हालत में होना भी शामिल है, इस पर असर डालता है कि इनमें से कौन-सी सामने आएगी। शायद इसीलिए चूक के ठीक बाद पुरानी आदत इतनी क़रीब महसूस होती है।
क्या मुझे अपने स्पॉन्सर या थेरेपिस्ट को चूक के बारे में बताना चाहिए?
हाँ, अगर आप ऐसा कर पाएँ। क्या हुआ, यह जानकर वे आपकी योजना में बदलाव करने में आपकी मदद कर सकते हैं। अगर आपका इलाज चल रहा है, तो अपने डॉक्टर को भी बताएँ। अगर चूक के बाद मन उदास रहे या निराशा घेर ले, तो किसी विशेषज्ञ से बात करें।
क्या रिलैप्स रिकवरी का हिस्सा है?
हो सकता है। NIDA, JAMA में छपे 2000 के एक अध्ययन के हवाले से बताता है कि नशे से जुड़े विकार (सब्सटेंस यूज़ डिसऑर्डर) का इलाज करा चुके लोगों में रिलैप्स की दर 40 से 60% है, जो हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा (50 से 70%) से मिलती-जुलती है। NIDA के अनुसार रिलैप्स का मतलब यह नहीं कि इलाज नाकाम हो गया। चूक बेख़तर नहीं होती, ख़ासकर ओपिओइड के मामले में, लेकिन यह सीखने की चीज़ है, इस बात का सबूत नहीं कि आप बदल नहीं सकते।
कल की बिना दोष वाली समीक्षा के लिए, Guardian Angel में आप हर दिन के रिकॉर्ड के साथ एक छोटा निजी नोट जोड़ सकते हैं, ताकि जो हुआ उसे ताज़ा रहते ही लिख सकें। इसे डाउनलोड करना मुफ़्त है, और आप जो भी दर्ज करते हैं, वह आपके फ़ोन से बाहर नहीं जाता।
अभी मदद पाएँ
- आपात स्थिति में: अगर आप ख़तरे में हैं या शारीरिक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे, या शराब या नशा छोड़ने के बाद भ्रम, मतिभ्रम या दौरे शुरू हों, तो 112 पर कॉल करें।
- अगर मन में आत्महत्या के ख़याल आ रहे हैं या सब कुछ बहुत भारी लग रहा है: टेली-मानस (Tele MANAS) को 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल करें। यह भारत सरकार की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है: मुफ़्त, 24/7 और कई भाषाओं में।
- शराब या ड्रग्स से जुड़ी मदद के लिए: राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 (टोल-फ़्री)।
- धूम्रपान या तंबाकू छोड़ने के लिए: राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन 1800-11-2356 (टोल-फ़्री)।
- जुए या सट्टेबाज़ी से जुड़ी मदद के लिए: टेली-मानस 14416 (मुफ़्त, 24/7)।
- भारत से बाहर हैं? Find a Helpline पर देश के हिसाब से मुफ़्त और गोपनीय हेल्पलाइन मिल जाएँगी।